​​​​सपा के अभेद्य किले में सेंध लगाने को भाजपा बेताब, 2027 की अग्निपरीक्षा के लिए दल-बदल तेज​​​​​

मुरादाबाद : 2027 के विधानसभा चुनावों की बिसात अभी से बिछनी शुरू हो गई है। इस चुनावी महासंग्राम में पीतल नगरी यानी मुरादाबाद का राजनीतिक समीकरण बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच चुका है। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में मुरादाबाद जिले की 6 सीटों में से 5 सीटों पर भारी जीत दर्ज कर समाजवादी पार्टी (सपा) ने इसे अपना एक अभेद्य किला साबित किया था। हालांकि, मुस्लिम बहुल मानी जाने वाली कुंदरकी विधानसभा सीट पर हुए फेरबदल के बाद अब वह सीट भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के कब्जे में जा चुकी है। वर्तमान में जिले की चार विधानसभा सीटों पर समाजवादी पार्टी का कब्जा है, जबकि लोकसभा में सपा की सांसद रुचि वीरा पार्टी का प्रतिनिधित्व कर रही हैं।

जैसे-जैसे 2027 का चुनावी वर्ष नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे सपा प्रमुख अखिलेश यादव के सामने इस गढ़ को पूरी तरह सुरक्षित रखने की कड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। चुनाव से ऐन पहले मुरादाबाद मंडल में दलबदल का दौर भी तेज हो चुका है। राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) और अन्य दलों के समीकरण बदलने के बाद कई स्थानीय नेताओं ने अपनी पुरानी पार्टियों का दामन छोड़ दिया है। इनमें से कुछ नेता जहां समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए हैं, वहीं कुछ ने सत्ताधारी गठबंधन का हिस्सा बन चुकी राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) का दामन थाम लिया है। नेताओं के इस पाला बदलने से जमीनी समीकरणों में बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या मुरादाबाद की जनता समाजवादी पार्टी के मौजूदा विधायकों के कामकाज और क्षेत्र में हुए विकास कार्यों से खुश है या उनके भीतर कोई छिपी हुई नाराजगी है। 2027 की चुनावी अग्निपरीक्षा में जनता विकास के मुद्दों, वादों और स्थानीय विधायकों के प्रदर्शन को किस तरह आंकेगी, यह तो आने वाला वक्त ही तय करेगा। फिलहाल, सपा के इस मजबूत किले को पूरी तरह ढहाने के लिए भाजपा एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है, वहीं समाजवादी पार्टी अपनी वर्तमान ताकत और सांसद रुचि वीरा के प्रभाव के दम पर अपनी जीत को कायम रखने का दावा कर रही है। मुरादाबाद की यह सियासी जंग इस बार सीधे तौर पर अखिलेश यादव की साख और भाजपा की आक्रामक रणनीति के बीच का मुकाबला बन चुकी है।

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